एक पत्नी के दो-दो पती, क्या ऐसा भी हो सकता है ?  

मेरा नाम मोहित है | मैं पंचकूला में रहता हूँ | मैं जिस सोसाइटी में रहता हूँ | उस सोसाइटी में मैं अकेला ही बैचलर हूँ | बाकी सब लोग अपनी अपनी फैमिली के साथ रहते हैं | किसी की अभी अभी शादी हुयी है तो किसी की शादी को पांच साल हो गए तो किसी की शादी को पन्द्रह साल | मैंने अपना फ्लैट ले रखा है | मेरा फ्लैट 2 बी एच के है जो की फर्स्ट फ्लोर पे है | फर्स्ट फ्लोर पे होने की वजह से मैं बालकोनी में कभी-कभी बैठ जाता हूँ | वहां बैठ कर चाय पी लेता हूँ और अखबार पड़ लेता हूँ | 

जब मैं नया-नया आया था तो सोसाइटी की औरतें मेरी तरफ ऐसे देखती थी जैसे मैं कोई अपराधी हूँ | मुझे डर लगता था बालकनी में खड़े होने से की कहीं कोई मुझे ये न कह दे की बालकोनी में खड़ा होकर तू हमारी बीविओं पर डोरे डालता है | 

फिर धीरे-धीरे मेरी सोसाइटी में जान-पहचान हो गयी | कुछ अंकल मुझे जान्ने लग गए और कुछ बच्चों के साथ मेरी दोस्ती हो गयी | शाम को जब भी मुझे समय मिलता है तो मैं बच्चों के साथ खेल लेता हूँ | 

Wife Cheats on Husband

वैसे तो सोसाइटी में जितने भी लोग रहते हैं सभी अच्छे हैं | अपनी-अपनी फैमिली के साथ अच्छे से रहते हैं | लेकिन कभी-कभी झगडे भी हो जाते हैं | लेकिन जल्दी ही निपट भी जाते हैं | सोसाइटी में रहने वाले सभी मर्द नौकरी करने वाले हैं | सुबह आठ वजे वो घर से निकल जाते हैं और शाम को कोई 6 वजे आता है तो कोई 8 वजे | कोई तो रात के 10 वजे जा 11 वजे तक आता है | इस तरह सोसाइटी की सभी औरतें दिन में अकेली रहती हैं अपने पती के बिना | जिनके बच्चे हैं वो बच्चों के साथ अपना समय बिताती हैं और कई औरतें आपस में गप-सप करती हैं | जब मैं बालकोनी में बैठकर यह सारा नज़ारा देखता हूँ तो मुझे बहुत अच्छा लगता है | एक ख़ुशी सी महसूस होती है की मैं कितनी अच्छी जगह पर रह रहा हूँ | एक ऐसी जगह जहाँ हर कोई अपनी फैमिली के साथ खुश है | अच्छे से रह रहा है | किसी को किसी दुसरे के घर में क्या हो रहा है इस बात की कोई चिंता नहीं है | 

वैसे मैं अपने काम के बारे मैं बता दूँ तो मैं सारा दिन अपने फ्लैट में ही रहता हूँ | जब थोड़ा मन करता है तो बाहर टहलने चला जाता हूँ और फिर फ्लैट में वापिस आ जाता हूँ | क्यूंकि मैं घर बैठकर ही ऑनलाइन काम करता हूँ जिससे मुझे अच्छी इनकम हो जाती है और मेरा फ्लैट का रेंट भी निकल जाता है और मेरा खुद खर्चा निकाल कर कुछ पैसे मैं घर भी भेज देता हूँ | 

मेरी ज़िंदगी अच्छे से गुजर रही थी | फिर एक दिन अचानक ऐसा हुआ की मेरी ज़िंदगी एक दम से बदल गयी | यह मेरी ज़िंदगी का अच्छा मोड़ है जा बुरा यह आप लोग मेरी कहानी पड़ने के बाद बताना | 

मेरे सामने के फ्लैट में एक औरत रहती है उम्र उसकी लगभग 40 के आस-पास होगी | उसका एक बच्चा है जिसे उनहोंने हॉस्टल में डाल रखा है वो कभी-कबार छुटियों में ही घर आता है, और कभी-कभी तो वो औरत और उसका पती ही अपने बेटे को मिलने के लिए चले जाते हैं | 

जबसे मैं इस सोसाइटी में आया था इस औरत ने कभी मेरी तरफ नहीं देखा था | जब इसका पती काम पे चला जाता था तो यह सारा दिन घर का काम ही करती रहती | काम करने के बाद आराम करती | बस कभी-कबार ही सोसाइटी की औरतों के साथ बातें करती वार्ना अपने फ्लैट में ही रहती | 

हुआ ये कि एक दिन मैं बालकनी में खड़ा था और वही मेरे सामने वाली औरत अपनी बालकनी में आयी | चाय पीते-पीते मेरी ऐसे ही उस पर नज़र पड़ी तो उसे देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए | दिल ने कहा कि अरे यह क्या ? क्या यह वही औरत है जिसे मैं रोज आम कपड़ों में देखता हूँ | उस औरत ने साड़ी लगा रखी थी | लेकिन अपनी चोली के ऊपर से कोई दुपट्टा नहीं लिया था | जिसकी वजह से बड़े-बड़े और गोल-गोल आम मेरे कच्छे में आग लगा रहे थे | मुझे एक पल के लिए लगा की मैंने आज तक ऐसी मस्त, खूबसूरत और पूरी फिर फिगर वाली औरत नहीं देखी | उस औरत ने इधर-उधर देखा और सामने रखे गमले की तरफ झुक गयी और उसे देखने के बहाने उसने अपनी छाती पर लगा हुआ सारा खजाना मेरे सामने खोल के रख दिया | मैं अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था | मुझे डर था की कहीं कोई मुझे उसे देखते हुए देख तो नहीं रहा | फिर अचानक से उसने गमले से नज़र हटाई और सामने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे वो शरेआम बोल रही हो कि, "आज मैं तुम्हें अपना सारा खजाना लुटा डालूंगी क्या तुम त्यार हो ?"  उसकी आंखों में क्या कशिश थी | उसके चेहरे पर क्या रौनक थी | उसके होंठ ऐसे दहक रहे थे जैसे कोई ज्वालामुखी अभी-अभी फटा हो | 

वो मेरी तरफ देखती ही रही मैं भी उसकी तरफ देखता ही रहा | तकरीबन 15 से 20 सेकंड के लिए हम दोनों ने एक दुसरे की आँखों में आँखें डाल के रखी | बिना पालक झपकाए हम एक दुसरे को देखते ही रह गए | ऐसा लग रहा था की इस सोसाइटी में सिर्फ हम दोनों ही हैं | हमे किसी का डर नहीं था | फिर अचानक से एक सब्जी वाले ने सोसाइटी में आवाज लगा दी और हमारा धेयान भंग हो गया | मैं दूसरी तरफ देखने लगा जैसे मुझे किसी को पता चलने का डर लग रहा हो | अब वो भी खड़ी हो गयी थी | वो मेरी तरफ देखे जा रही थी और मुस्करा रही थी | मानो जैसे बोल रही हो की बुद्धू यह तो सब्जी वाला है इससे क्या डरना | तुम अपना काम चालु रखो | मैं भी थोड़ा मुस्कराया | फिर उसने मुझे शत पर आने का इशारा किया | मैं हैरान था की जो औरत आज तक मेरी तरफ आँख उठा कर भी नहीं देख रही थी आज मुझे सीधे-सीधे शत पे आने का इशारा कर रही है | मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था की यह हो क्या रहा है ? 

मेरा दिमाग जैसे सुन सा हो गया था | कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करूँ | ऐसे ही मुझसे हा में सिर हिलाया गया | मेरी मन्जूरी लेकर वो अंदर चली गयी | मैं भी जल्दी से उठा और नीचे आ गया और उसके फ्लैट की सीढ़ियां चढ़ कर छत पे चला गया | मेरे मन में हजारों सवाल चल रहे थे लेकिन यह नहीं पता था कि कोनसा सवाल पहले पूछने वाला है और कोनसा बाद  में | लगभग पांच मिनट के बाद वो भी ऊपर आ गयी और आते ही उसने सीधा यही बोला, "दिखने में तो हट्टे-खट्टे हो लेकिन डरते बहुत हो" उसकी यह बात सुनते ही मैं हैरान रह गया | और यह सोचने पर मजबूर हो गया कि यह किस तरह की औरत है ? पहले तो किसी की तरफ देखती भी नहीं थी और आज एक अनजान लड़के के साथ सीधा ही बात कर रही है जैसे मैं उसका पती हूँ | मैं थोड़ा संभला और मैं कहा, "नहीं-नहीं इसमें डरने की क्या बात है | छत्त पर तो कोई भी आ सकता है |" उसने कहा, "क्या तुम मुझे पसंद करते हो ?" मैंने कहा, "आप न पसंद करने की कोई वजह भी नहीं है, आप इतनी खूबसूरत हैं की आपको तो कोई भी पसंद कर ले", तो मैं उसके मन में क्या है यह जान्ने की लिए एक सवाल और पुछा, लेकिन आप यह सवाल मुझसे क्यों पूछ रही हैं ?"  तो उसने इसका जवाब नहीं दिया और बोली, "आज रात को 8 वजे के बाद तुम मेरे घर आ जाना रात को बताउंगी | " मैंने कहा नहीं-नहीं अगर तुम्हारे घर आते हुए मुझे किसी ने देख लिया तो मेरा तो यहाँ रहना मुश्किल हो जायेगा |" वो थोड़ा मुस्करायी उसकी आँखों में कशिश अब भी बरकरार थी | मेरी आँखों में आंखें डालकर उसने कहा, "अगर इतना डरोगे तो निभा नहीं पाओगे" मैं सोच में पड़ गया कि क्या नहीं निभा पाउँगा | तो उसने फिर कहा, "कोई बात नहीं मेरे जवान आशिक़ तुम मत आना मैं आ जाउंगी तुम्हारे फ्लैट में, तुम बस तयार रहना | इतना बोल कर वो सीढ़ियां उतर कर नीचे आ गयी और मैं भी अपने फ्लैट में आ गया | उसके बाद मैं सारा दिन उसे देखने के लिए मचलता रहा लेकिन वो बाहर नहीं आयी | मैं कभी बालकनी में चला जाता तो कभी नीचे टहलने लग जाता | पता नहीं मुझे क्या हो गया था | बार-बार घडी की और देख रहा था | ऐसा लग रहा था कि आज का दिन कई हजार घंटों का हो गया है, दिन ढलने का नाम ही नहीं ले रहा | 

ऐसे ही शाम हो गयी मैं उसका इन्तजार करने लगा की वो आएगी | मैंने फ्लैट का दरवाजा भी खुला छोड़ रखा था | फिर जब ही आठ वजे वो मेरे फ्लैट के अंदर थी मुझे भी पता नहीं चला की वो कहाँ से आ गयी | अंदर आते ही उसने दरवाजा बंद करके कुण्डी लगा दी और फ्लैट को दोनों कमरों को देखने लगी फिर किचन देखा | और बोली, "यह क्या हाल बना रखा है घर का ?" मेरे मुँह से कुछ नहीं निकला, क्यूंकि मुझे तो यह सपना ही लग रहा था | वो एकदम से मेरे घर का काम करने लग गयी | उसने सारा किचन साफ़ कर दिया बर्तन धो दिए | पूरे फ्लैट में झाड़ू लगा दिया और पोछा भी | मैं बस उसे देखता ही रहा | 

सारा काम करने के बाद वो कमरे में आकर बेड पर बैठ गयी | जैसे मानो यह मेरे नहीं उसी का घर हो | उसके चेहरे पर डर का एक शिकन तक नज़र नहीं आ रहा था | उसने एकदम से अपनी साड़ी उतार दी, अब उसके शरीर के ऊपर सिर्फ चोली थी और साड़ी के नीचे का गागरा था | उसका बदन इतनी दहक रहा था मानो कई सालों की गर्मी आज एक दम से उसके सरीर से निकल रही हो | उसने मुझे कहा, "शरमा क्यों रहे हो आओ बैठो, मेरी बाहों में आ जाओ, मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूँगी बस पयार ही करुँगी | " इतनी बेबाक और जबरदस्त औरत को देखकर कोई भी मर्द अपना मानसिक संतुलन खो दे | मैं बेड पे जा के बैठ गया | तो उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया | और जोर-जोर से किस करने लगी | अब मुझे भी मजा आने लगा | मैं सारे सवाल भूल गया और मस्त हो गया | मेरे अंदर की आग भड़क गयी और मैं भी उसे किस करने लगा | किस करते-करते मैं उसकी चोली उतार दी | चोली उतारते ही फूटबाल की तरह बड़े-बड़े मम्मे मेरी आँखों के सामने थे | मेरा औजार लठ की तरह खड़ा हो गया था | मैं एक दम से पागल सा हो गया और वो भी कुछ ऐसे ही थी | मैंने जम कर उसका दूध पिया | वाह क्या नज़ारा था | इस रोलप्ले  पता ही नहीं चला की कभ हम दोनों के कपडे हमारे शरीर से उतर गए | अब हम दोनों बिलकुल नंगे थे मेरा औजार खड़ा था और उसकी गुफ़ा चमक रही थी | मैंने उसकी गुफा को हाथ से सहलाया तो औजार ने ग्रीन सिग्नल दे दिया | इतनी नरम और इतनी मोलायम | मैंने अपनी बड़ी ऊँगली गुफ़ा में घुसेड़ दी तो उसकी आह निकल गयी, "हाय मेरे आशिक़ ऊँगली निकाल लो और औजार को डाल दो" | मैंने भी देर नहीं लगायी उसकी टांगों को उठा कर अपने कन्धों पर रखा और औजार को गुफ़ा के ऊपर थोड़ा रगड़ कर एक दम से धक्का दे दिया | औज़ार अंदर जाते ही उसने मुझे कस के पकड़ लिया | मेरी पीठ को नाखूनों से काटने लगी | और आहें भरने लगी | मैंने तो अभी अंदर ही डाला था | वो नीचे पड़ी हिलने भी लगी | उसे बहुत मजा आ रहा था | मैंने भी पूरे जोश में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए | 

हम दोनों इस दुनिया को भूल चुके थे | और अपने ही मजे में डूबे हुए थे | कभी वो मेरे ऊपर बैठ कर धक्के मार रही थी तो कभी मैं उसके ऊपर | कभी खड़े होकर, कभी घोड़ी बनाकर, तो कभी कुतिया बनाकर मैं उसे पेले ही जा रहा था | और वो मुझे चीख-चीख कर और जोर से करने को बोल रही थी | मैं भी लगातार बिना रुके घोडा चलाये जा रहा था | जैसे मानों यह रेस मुझे ही जीतनी हो | इतना मज़ा, इतना सकूं मुझे पहले कभी नहीं आया था | उसका पूरा सरीर मानों मखमल हो | मेरा दिल कर रहा था कि सारी रात उसके ऊपर ही लेता रहूं | वो कहीं जाए न बस मेरे पास ही रहे | 

इन्ही ख्यालों से बाहर निकल मुझे पता चला की मेरा तो झड़ गया है और अब वो भी शांत हो चुकी थी | उसने कहा, " मेरे ज़बरदस्त आशिक़ तुम्हें नहीं पता तुमने मेरी सदियों की पयास बुझा दी | मैं जन्मों से प्यासी थी और तुम्हारे जैसे आशिक़ की तलाश में थी | आज जाकर मेरी तलाश ख़तम हुयी है | 

मैं उसके ऊपर ऐसे ही लेट गया और मैंने कहा, "क्या मैं तुम्हारे ऊपर सो सकता हूँ ?" उसने कहा, "क्यों नहीं मेरी जान आज से मैं सारी की सारी तुम्हारी हूँ तुम मेरे ऊपर सो भी सकते हो, जब जी चाहे मेरी ले भी सकते हो | जो तुम्हारा मन करे | " मैं उसके ऊपर लेता था और हम दोनों ऐसे ही बातें करते रहे सारी रात हमने एक दुसरे के बारें में काफी कुछ जाना | असल में उसका पती बच्चा होने के बाद से उसके साथ सोया नहीं था | क्यूंकि उसको मजा नहीं आता था | उसका कहना था की उसकी गुफा पहले से बड़ी हो गयी है | इसी वजह से उसका बाहर ही चाकर चलता था | और यहाँ घर में यह औरत अकेले ही इतने सालों से किसी मर्द का इन्तजार कर रही थी जो उसकी गुफा को देखे बिना उससे पयार करे | लेकिन उसकी यह बात सुनने के बाद मुझे उसके पती के ऊपर तरस आ रहा था क्यों के उसकी गुफा बहुत मस्त थी | मुझे इतना मजा पहले कभी नहीं आया था | 

सुबह होते ही वो चली गयी | उसके बाद जब भी उसका पती रात को घर नहीं होता था तो वो मेरे पास आ जाती  हम दोनों सारी रात मजा करते | हम दोनों एक दुसरे के साथ एक पती-पत्नी की तरह रहने लगे थे | बस यहाँ फर्क सिर्फ इतना था की दुनिया की नज़र में उसका पती कोई और था और उसकी नज़र में उसका पती मैं था |