आंटी मुझे अपने पास सुला लेती थी फिर उसके बाद...  

यह उस समय की बात है जब मैं 14 साल का था | अब मैं कभी-कभी सोचता हूँ के तब मैं 18 या बीस साल का क्यों नहीं था | किस्सा शुरू करते हैं | हमारे घर में एक फैमिली किराए पर रहने के लिए आयी उनका एक डेड साल का बच्चा भी था | बंदे को मैं भइआ बोलता था और उसकी पत्नी को आंटी | ऐसा क्यों था यह आज तक मुझे भी नहीं पता चला | चलो खैर, जो भइआ थे वो बिजली का काम करते ते उनकी दूकान थी, लोगों के बिजली के कनेक्शन लगाने जा फिर फंखे ठीक करने यही उसका काम था | 

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आदमी बहुत अच्छा था लेकिन उसमें एक बुरी आदत थी और वो थी शाम को इतनी शराब पीना के होश भी न रहे | कभी-कभी तो वो शाराब से टुन होकर दूकान पर ही सो जाता था | इसी वजह से आंटी मेरी मम्मी को बोल के मुझे अपने पास सुला लेती थी | 

उसका बेटा छोटा था जिसकी वजह से वो मुझे अपने पास सुला लेती थी ताकि उसे डर न लगे | मैं भी तब एक बच्चा ही था | यह बात भी मुझे बहुत समय बाद पता चली | आंटी रात को कभी तो मुझे अपनी टांगों पर चढ़ा लेती थी और कभी अपनी कमर पर | क्यूंकि उसकी टाँगे और कमर दर्द करती थी तो मैं उस पर चढ़कर उन्हें दबाता था | 

कभी-कभी तो वो मुझे अपनी गांड पर भी चढ़ा लेती थी मेरे दोनों पैर उसके मोटे-मोटे गांड के ऊपर जब टिकते तो मैं हिलने लग जाता क्यूंकि उसकी गांड हिलती थी इसीलिए | जैसे कोई हाथों से गांड खोल रहा हो वैसे ही मैं पैरों से खोल देता था | 

लेकिन तब मैं बच्चा था और अभी सोचता हूँ के काश मैं जवान होता और आंटी का सारा दर्द दूर कर देता | यह सारा काम करने के बाद मैं उसी के साथ सोता भी और वो भी उसके पेट के ऊपर अपनी टांग रखकर और वो रखने भी देती थी | 

मुझे नहीं पता के उसे कैसा महसूस होता था | लेकिन तब मुझे तो कुछ महसूस नहीं होता था लेकिन जब आज सोचता हूँ उस  बारे में तो मेरा खड़ा हो जाता है, और सोचता हूँ कि काश वो मुझे आज अपने पास सुला ले और मुझे कहे के मेरे ऊपर चढ़ जा कितना मजा आएगा | 

इस बात को आज पन्द्रह साल हो चुके हैं | जब  भी आंटी की याद आती है तो औज़ार सख्त हो  जाता है | अगर ऐसा कभी आपके साथ भी हुआ है तो कमेंट में अपना किस्सा जरूर लिखें |