एक विधवा बनी नयी दुल्हन, पूरी कहानी पढ़कर मज़ा आएगा 


मैं एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी में काम करता था | जिसमें शादी-शुदा औरतों के ग्रुप बना कर उन्हें लोन दिया जाता है | मैं अपने घर से 200 किलोमीटर दूर जॉब करता था | मेरे पास 900 औरतें थी जिनसे मैं हर रोज़ किश्तें लेकर आता था | मैं हर रोज़ 100 से 150 औरतों को मिलता था | सभी मेरे से उम्र में बड़ी ही होती थी क्यों के मैं शादीशुदा नहीं था और हमारी कंपनी शादीशुदा औरतों को ही लोन देती थी | 

मैं एक हफ्ता किश्तें इकठी करता था और एक हफ्ता नया ग्रुप बनाकर उन्हें लोन प्रोवाइड करवाता था | बस ऐसे ही मेरी ज़िंदगी कट रही थी | मेरी ड्यूटी गायों में ही हुआ करती थी | हर रोज़ मैं एक नया गाँव घूमता था | बहुत से लोग मुझे जानने लग गए थे |  

कुछ औरतें सूंदर थी और कुछ बूढ़ी और कुछ आम औरतों जैसी | मैं बस अपना काम करता था और ऐसा-वैसा कुछ भी करने के बारें में कभी नहीं सोचता था | फिर भी भाई मर्द हूँ औरतों को देखकर तो हर एक मर्द फिसल जाता है | मुझे भी वो अच्छी लगती थी, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था, क्यूंकि आप एक औरत की मर्जी के खिलाफ कुछ कर नहीं सकते और न ही करना चाहिए | औरतें मुझे पसंद तो करती थी लेकिन किसी ने कभी अपनी इच्छा ज़ाहिर नहीं की थी | कि वो मुझे पसंद करती हैं, जा मेरे साथ सोना चाहती है, या फिर ऐसा ही कुछ और | 



लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि न ही कुछ मैं बोला और न ही वो बोली लेकिन सभ कुछ हो गया | हुआ यह कि मेरी एक क्लाइंट के हस्बैंड की डैथ हो गयी थी उसकी डैथ को दो महीने से जयादा समय हो गया था | हमारी कंपनी का एक रूल था के जब क्लाइंट या क्लाइंट के हस्बैंड की डैथ हो जाती है तो उसका सारा लोन माफ़ कर दिया जायेगा, बल्कि इसके इलावा उसे जितना लोन दिया गया है, उतना ही पैसा और दिया जायेगा | लेकिन इसका एक प्रोसेस है जिसकी वजह से काफ़ी टाइम भी लग जाता है | मैं उस औरत को जानता तक नहीं था, क्यूंकि उसके पती की मौत के बाद उसकी किश्त बंद हो चुकी थी इसीलिए वो मीटिंग में भी नहीं आती थी | 

चार महीने बाद उसके लिए कंपनी की तरफ से चेक बन के आ गया | और मैंने मीटिंग में दूसरी औरतों को बोल दिया के अगली मीटिंग में उसे आने के लिए बोल देना मैं उसे चेक दे दूंगा | अगली मीटिंग में मैं पहुँच गया, और वो भी पहुँच गयी | मैंने पहले सभी औरतों से पैसे इकठे किये और उसके बाद मैंने उस औरत का नाम पुकारा, वो लाइन में बिलकुल पीछे बैठी थी और उसने मेरी तरफ देखा, मेरी तरफ देखते ही मेरी आंखें उसकी आँखों में डूब गयी | उसने मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे वो मुझे खा जाएगी, मुझे जो महसूस हुआ वो यह था कि वो औरत मेरे साथ सोना चाहती है, यह चाहत उसके अंदर से आयी थी | मेरे पास टाइम कम था यह समझने के लिए उस औरत के अंदर कितनी बेसब्री और आग थी | जिसे वो मेरे साथ मिलकर बुझाना चाहती थी | 

मैंने जल्दी ही फैसला किया और उसे कहा कि मैं आपका चेक भूल आया हूँ, आज शाम को सारा काम निपटाने के बाद मैं आपको स्पेशल वो चेक आपके घर पे देने आ जाऊँगा | उसने मुस्करा के कहा, "जी ठीक है" | 




मैं चला गया और उसके बाद मैं सारा काम निपटा के शाम को करीब अँधेरा होने से पहले उसके गायों के लिए निकल गया और जब मैं उसके घर पहुंचा तो अँधेरा हो चूका था | वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी | वो घर में अकेली ही थी, मुझे लगा कि उसके सास-ससुर होंगे,  और मैंने उससे पुछा भी तो उसने बताया की वो और उसका पती अकेले ही रहते थे | उसका पती बूढ़ा था क्यूंकि उस औरत के  घरवालों ने उसकी शादी बूढ़े से ही कर दी थी | जिसकी वजह से वो अपने पती के साथ रह तो रही थी लेकिन उसे पयार नहीं करती थी | बूढ़ा होने की वजह से उसका पती बीमारी से मर गया | अब वो अकेली ही रह गयी है | 

मुझे यह सुनकर दुःख भी हुआ लेकिन उसके लिए अच्छा भी लगा के अब वो अपनी मर्जी से ज़िंदगी गुज़ार सकती है | 

उसने मुझे अंदर बैठने के लिए बोला और किचन में चली गयी चाय बनाने के लिए | मैंने चाय पीने से मना कर दिया, और मजाक से कहा, कि रात को चाय कौन पीता है, हम तो रम पीते हैं |" तो उसने मुस्कराते हुए कहा, "इसमें कोनसी बड़ी बात है? मैं रम ले आती हूँ" मैं हैरान हो गया, तो उसने बोला के मेरे पती रम पीते थे इसीलिए घर में अभी भी कई बोतलें पड़ी हैं | वो रूम से एक बोतल उठा लायी और मेरे सामने वाली टेबल पे रख दी, मुझे पानी और बाकी खाने पीने के चीजें ला कर मेरे सामने रख दी और मुझे पेग लगाने के लिए बोल कर खुद कमरे में चली गयी | मैं तो बस आस-पास देखे जा रहा था कि ये आखिर हो क्या गया है ? जिस औरत को मैं पहले जानता भी नहीं पहली बार मिला हूँ वो सीधा मुझे रम पीला रही है ? वाह क्या बात है ? मैंने भी उसके बाद इन्तजार नहीं किया और गिलास उठाया और एक बड़ा सा पेग गले के नीचे उतार लिया | रम अंदर जाते ही मेरी आग बाहर आने लगी | उस औरत को अंदर गए हुए 10 मिनट से ऊपर हो गए थे | मैं सोच रहा था की वो अंदर क्या कर रही है ? सोचते-सोचते मैंने एक बड़ा सा पेग और गटक लिया | रम के दो पेग अंदर जाते ही मेरी जवानी और जोश बाहर आ चूका था अब तो बस इन्तजार था उस बला का जिसने मेरा जोश जगाया था | 

थोड़े टाइम के बाद वो कमरे से बाहर आयी और उसने मुझे पुकारा, जब मैंने उसे पलट कर देखा तो बस देखता ही रह गया, वो लाल जोड़े में सजी हुयी थी | उसने वो जोड़ा पहना हुआ था जो औरतें अपनी शादी के दिन पहनती हैं | मैं उसे इस ड्रेस में देखकर हैरान था | मैंने उससे पूछना चाहा तो उसने कहा इस बात का जवाब न ही जानो तो अच्छा है | फिर वो मेरे पास बैठ गयी और उसने मेरे लिए एक पेग बनाया और मैंने वो भी गटक लिया | अब मैं घोड़ी चढ़ने और घोड़ी को तेज रफ़्तार से भगाने के लिए तयार था | 

उसने मुझे कमरे के अंदर आने के लिए कहा, मैं उठा और उसके साथ कमरे के अंदर चला गया, अंदर जाकर देखा तो बेड को सजाया हुआ था | मुझे ऐसा लगने लगा की आज मेरी सुहागरात है | कमरे के अंदर जाते ही दोनों एक दुसरे को ज़बरदस्त तरीके से चूमने लगे, जैसे कई जन्मों के भूखें हों | उसके होंठो की लाल लिपस्टिक को मैंने पूरा खा लिया था हम दोनों के होंठ लाल हो चुके थे | वो भूखी शेरनी की तरह मुझ पर टूट चुकी थी और कपडे उतार रही थी, जैसे मैं उसकी नहीं वो मेरी मारना चाहती हो | 

उसने मेरे सारे कपडे उतार दिए और धीरे-धीरेअपने कपडे उतारने लगी, मैं बिलकुल नंगा हो चूका था | जैसे-जैसे वो अपने कपडे उतारती गयी मेरा औज़ार उसकी मशीन में जाने के लिए उतावला होने लगा | उसने एक-एक करके अपने सारे कपडे उतार दिए, अब उसके बदन पर सिर्फ ब्रा-और पेंटी रह गयी थी | वो भी लाल रंग की | जिसमें वो इतना केहर ढा रही थी कि किसी बूढ़े का भी खड़ा हो जाए | मैं तो फिर भी जवान था | 

फिर वो मेरे पास बेड पर आयी और मेरे सामने आकर बैठ गयी | मेरी आँखों में आंखें डालकर मुझे कहा, "मैं कभ से तुम्हारे जैसे जवान मर्द को तलाश रही थी | आज जाकर मेरी तमन्ना पूरी हुयी है | अब मेरी जान देर मत लगाओ मेरी पयास बढ़ती जा रही है इसे बुझा दो प्लीज |" फिर उसने धीरे से अपनी ब्रा को उतारा, ओह्ह माई गॉड दूध की तरह सफेद और मोलायम गुब्बारे | इतने मोलायम कि रेशम भी मात खा जाए | मैंने अपने दोनों हाथों में गुबारों को पकड़ा और मेरा नशा और बढ़ गया | मैं गुबारों को काटने लगा, अपनी जीभ से चाटने लगा और वो पूरी मस्त होकर बेड पर लेट गयी और मज़े लेने लगी, आहें भरने लगी, आह, आह्ह्ह्ह , आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह | 

फिर मैंने उसकी पेंटी को उतारा तो देखा कि उसकी मशीन बिलकुल साफ़ थी जैसे अभी फैक्ट्री से नयी बनकर आयी हो | इतनी चमकदार कि कोहेनूर हीरे की चमक भी फीकी पड़ जाए | मेरे औज़ार को अब और इंतजार पसंद नहीं था | मैंने उसकी टाँगे उठा कर अपने कंधो पर रख ली और अपने मोटे-तगड़े औज़ार को उसकी मशीन के ऊपर रख कर जैसे ही मैंने धक्का मारा, उसकी आह्हः नहीं चीख निकल गयी | उसने मेरी गर्दन पर अपने नाखून गड़ा दिए | 

मैं अपने पैरों पर बैठ गया और अपनी पूरी ताकत के साथ धक्के मारने शुरू कर दिए, पूरे कमरे में दिवाली के पटाखों की आवाज़ गूँज रही थी | और हम दोनों की आहें निकल रही थी मज़े से, आनंद से | मैं बिना रुके धक्के मारता ही गया | वो भी पूरे जोश में थी और फूल मूड में | 

फिर मैंने उसे बेड पर ही घोड़ी बना लिया, और उसके वाल पकड़ कर अपना घोडा अंदर डाल दिया और घोड़ी को इतनी तेज़ रफ़्तार से भगाने लगा की मेट्रो ट्रैन भी पीछे रह जाए,  मैंने इतने सकून से इतना मज़ा कभी नहीं किया था | यह औरत कोई औरत नहीं अप्सरा थी | जो मुझे आनंद देने के लिए धरती पे आयी थी | इसकी जवानी,  इसकी मशीन, इसके गुब्बारे,इसकी पीठ, इसके होंठ, इसकी आँखें, इसके गाल, हर एक चीज परफेक्ट थी | लेकिन दिन में यह जयादा खूबसूरत नहीं दिख रही थी | 

मैंने सारी रात में 3 राउंड फायर किये और उसने कितने किये यह मुझे नहीं पता | मुझे तो बस मज़ा आ रहा था | मेरा तो मन कर रहा था कि यह रात कभी ख़तम ही न हो | मैं ऐसे ही अपने औज़ार को उसकी मशीन में फसा कर लेता रहूं और उसके होंठों का रसपान करता रहूं | उसकी गहरी काली-काली आँखों में डूब जाऊं | 

फायर करते-करते सुबह हो चुकी थी | इससे पहले के गाँव के लोग जगें मुझे चले जाना चाहिए | मैंने उसे जाने की इच्छा ज़ाहिर की उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने सीने से लगा लिया और बोली, "अगर मैं विधवा न होती तो मैं तुम्हारे साथ शादी कर लेती, लेकिन मैं तुम्हारी ज़िंदगी भी खराब नहीं करना चाहती, तुम्हारे आगे सारी ज़िंदगी पड़ी है | लेकिन मुझे तो सारी उम्र ऐसे ही जीना होगा, एक विधवा बनकर | " तो मैंने कहा, "मेरी जान तुम दुखी मत हो तुम्हें जब भी मेरी जरूरत होगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा | चाहे कहीं भी रहूं " 

और आज भी जब कभी मुझे उसकी मशीन और गुबारों की याद आती है तो मैं अपने औज़ार के साथ उसकी फैक्ट्री में पहुँच जाता हूँ, और जब कभी उसे लगता है कि उसकी मशीन को जंग लगने वाली है वो मुझे बुला लेती है और मैं अपने औज़ार के साथ उसकी सारी जंग उतार देता हूँ | 

वो अब बहुत खुश है, और  मैं भी | मुझे नहीं पता कि हमारे इस रिश्ते को मैं क्या नाम दूँ, लेकिन हमारा जो भी रिश्ता है शायद ऊपर से ही बनकर आया है |