लाइब्रेरी टीचर ने मुझे किताब पड़ना सिखाया और वो भी बारिश में भीगते हुए 

यह बात उन दिनों की है जब मैं बाहरवीं कक्षा पास करके नया-नया बी.ए. करने कॉलेज में दाखिल हुआ था | मुझे नहीं पता था कि कॉलेज की लाइफ कैसी होती है | वहां के टीचर से कैसे पेश आना है और वहां के स्टूडेंट्स से कैसे दोस्ती बना के रखनी है या फिर उनके साथ कैसे रहना है | 

मुझमें शुरू से एक आदत है और वो है ज्यादा से ज्यादा किताबें पड़ना | इसीलिए मैं स्कूल में भी हर समय जब भी फ्री होता था तो लाइब्रेरी में होता था | और कॉलेज में भी मैं ऐसा ही करने लगा, मेरे कोई ज्यादा दोस्त नहीं बने क्यूंकि जो लड़का हर समय किताबों में ही डूबा रहे उससे कौन दोस्ती करना चाहेगा ? मैं अपना लेक्चर लगा कर जब भी फ्री होता तो कॉलेज की लाइब्रेरी में आकर बैठ जाता और कोई न कोई बुक इशू करवा कर उसे पड़ने लग जाता अगर कॉलेज का टाइम ख़तम होने तक मैं उसे पड़ लेता तो वापिस कर देता वार्ना मैं किताब घर ले जाता और अगले दिन वापिस कर देता और नयी किताब इशू करवा लेता | 




हमारे कॉलेज की जो लाइब्रेरी टीचर थी वो हैरान होती थी की मैं इतनी किताबें पड़ता भी हूँ जा ऐसे ही वापिस कर देता हूँ | एक दिन जब मैं किताब वापिस करने गया तो कॉलेज में छूटी हो चुकी थी सभी स्टूडेंट और टीचर जा रहे थे और लाइब्रेरी वाली मैडम ने भी जाना था तो मैं एक किताब वापिस करके दूसरी इशू करवा रहा था | मैडम ने मुझसे पुछा के तुम इतनी किताबें पड़ते भी हो जा ऐसे ही वापिस कर देते हो ? तो मैंने कहा, "जी हाँ मैडम मैं पड़ता हूँ आप चाहे तो किसी भी किताब से जो मैंने इशू करवाई है मुझसे कुछ भी पूछ सकते हैं |" तो उन्होंने मुझसे कई सवाल पूछे और मैंने सही जवाब दिए | मैडम मुझसे बहुत प्रभावित हुयी और खुश भी हुयी के आज कल के ज़माने में कोई तो ऐसा स्टूडेंट है और किताबें पड़ने के लिए जनूनी है | 

उसके बाद मेरा मैडम के साथ एक अच्छा रिश्ता बन गया | हम दोनों किताबें पड़ते और एक दुसरे के साथ डिसकस करते | धीरे-धीरे मैडम मेरे नज़दीक आने लगी | तब मुझे नहीं पता था लेकिन आज पता है | कभी-कभी वो मेरे लिए खाना भी ले आती और हम दोनों कैंटीन में बैठ कर इकठे खाते | 

मैडम की उम्र मेरे से 15 ज्यादा थी | और उनका डाइवोर्स का केस चल रहा था | अब वो अपने घर में अकेली ही रहती थी | वो भी मेरे जैसी ही थी कॉलेज में किसी और के साथ उसका कोई मेल-जॉल नहीं था | बस उतना ही जितना काम हो | लेकिन वो जब भी मेरे साथ होती तो बहुत खुश होती | मैं भी बहुत खुश होता | मुझे तो यकीन ही नहीं था कि कोई औरत मेरे साथ इतना टाइम कैसे रह लेती है | मेरे स्कूल दोस्त तो मुझसे पांच मिनट में ही बोर हो जाते थे | लेकिन मैडम हमेशा मुझे सुनती है और कभी-कभी मुझे कुछ सुनाती है और जो मुझे पता न चले वो समझाती भी थी | 

हमारी नज़दीकियां इतनी बढ़ने लगी कि मैडम ने मुझे अपने घर पे बुला लिया | अब हम कॉलेज के बाद ही उसके घर चले जाते और अँधेरा होने तक हम दोनों पड़ते बाते करते और फिर मैं घर आ जाता | 

उसके घर पे वो मुझे एक स्टूडेंट की तरह नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह ट्रीट करती | हसीं-मज़ाक चलने लगा | फिर एक मैं उसके घर पे था, शाम हो चुकी थी, लेकिन आसमान में बिजली चमकी और ज़ोर सी बारिश होने लगी | मेरा घर मैडम के घर से लगभग 10 किलोमीटर दूर था | मैडम ने मुझे वहीँ पर रुकने के लिए मना लिया | मुझे भी क्या दिक्कत थी मैं रुक गया | 


हमने डिनर किया उसके बाद थोड़ा टाइम हमने बातें की और मैडम के मन में पता नहीं क्या आया वो बोली, "राकेश बारिश में नहाएं ?" मुझे भी बारिश में भीगना अच्छा लगता था | तो मैंने हाँ कर दी | हम दोनों मैडम के घर के आँगन में बारिश में भीगने लगे | मैडम ने लाल रंग का बलाऊज और हरे रंग की साड़ी पहनी हुयी थी | बारिश में भीगते ही मैडम की साड़ी उसके सरीर के साथ चिपक गयी | मैडम ने अपना पल्लू गिरा दिया | अब मुझे उसके बलाऊज में से इतने बड़े-बड़े और भारी-भारी गोल-गोल दूध नज़र आने लगे | मेरी नज़र पड़ी तो मैं नज़र हटा ही नहीं पाया | मैं भी पूरा भीग चूका था और मेरी पेंट में से मेरा औज़ार पूरा तन चूका था | जैसे किसी ने लोहे की रोड सीधी करके मेरी पेंट में फसा दी हो | मेरे तन-बदन में आग लग गयी | मेरी जवानी आज चार्म-सिखर पर थी | ऐसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था | भीगते-भीगते मैडम ने मुझे उसके बलाऊज से बाहर आते गुबारों को देखते हुए देख लिया, मेरी नज़र हट ही नहीं रही थी | 

मैडम की नज़र मेरी पेंट पर पड़ी उसे पता चल चूका था कि आग तो लग चुकी है | और वो भी दोनों तरफ | वो मेरे पास आयी और मुझे जोर से पकड़ कर मेरे सीने से चिपक गयी | मुझे कुछ समझ नहीं आया | मैंने भी जोर से मैडम को अपने सीने से चिपका लिया | मैडम का पूरा बदन किसी लावे की तरह गर्म-गर्म था | ऐसा लग रहा था की बारिश की बूंदे उसके बदन पर पड़ते ही भाप हो रहीं हैं | 

वो मेरे सीने से काफी समय तक चिपकी रही | बारिश लगातार बढ़ती ही जा रही थी | अच्छी बात यह थी के मैडम के घर के आस पास कोई घर नहीं था और उसके घर की दीवारें बहुत ऊंची थी | जिसकी वजह से हमें वहां कोई देख भी नहीं सकता था | 

उसके बाद मैडम ने मेरी शर्ट उतार दी | और मेरा बदन चूमने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा था | क्यूंकि यह मेरे साथ पहली वार हो रहा था | इसीलिए थोड़ी-थोड़ी गुदगुदी हो रही थी लेकिन अच्छा लग रहा था | मैडम ने अपनी साड़ी उतार के फ़ेंक दी अब उसके बदन पर सिर्फ बलाऊज और घागरा रह गया था और मैंने अपनी पेंट उतार के फ़ेंक दी | अब हम दोनों आधे नंगे थे | मैडम मेरे नज़दीक आयी बहुत नज़दीक मेरे होंठों के बिलकुल पास, मैं कुछ बोलने के लिए ज़ुबान खोलने ही वाला था की मैडम ने अपने रसीले होंठ मेरे होंठों पे रख दिए और जैसे कोई बचा कुल्फी को चूसता है वो मेरे होंठों को चूसने लगी | मुझे मजा आया फिर उसने कहा तुम भी ऐसे ही करो, फिर मैंने मैडम के होंठ चूसने शुरू कर दिए मैडम हम्म्म अम्म्म करने लगी | पूरी मचलने ले | उसे पूरा मजा आ रहा था | 

होंठ चूसने के बाद मैडम ने अपना घागरा भी उतर कर फ़ेंक दिया और अपना बलाऊज भी | मुझे अपना कच्छा उतारने के लिए कहा | अब मुझे थोड़ी ठण्ड तो लग रही थी लेकिन मैं महसूस नहीं कर पा रहा था |  जब मैडम ने अपनी पेंटी उतारी तो मुझे ठंड लग्न भी बंद हो गया | अब हम दोनों बिलकुल नंगे थे और वो भी मैडम के घर के आँगन में पूरी बारिश में भीगते हुए | यह भी एक अलग ही मजा था जो न तो मैंने पहले कभी किया था और न ही उसके बाद आज तक | आँगन में थोड़ा पानी रुक चूका था मैडम लेट गयी पानी में और मुझे इतना तो पता था की अब क्या करना है | मैं भी मैडम के ऊपर लेट गया और अपना औज़ार अपने हाथ में पकड़ा और मैडम की गुफा के ऊपर रगड़ने लगा | मैडम जोर-जोर से आहें भरने लगी | मचलने लगी, जैसे कोई सांप रेंगता है वैसे रेंगने लगी | मैं भी मैडम के साथ-साथ अपना औज़ार लिए उसकी गुफा पे रगड़े जा रहा था | तो मैडम ने कहा, "राकेश किताब के कवर को बहुत पड़ लिया अब अंदर भी देखो क्या लिखा है ?" मैडम के इतना बोलते ही मैंने अपना 9 इंच का औज़ार मैडम की गुफा में घुसेड़ दिया और उसके ऊपर चिपक कर लेट गया | मैडम की जोर से एक आह निकल गयी | 

मैं जोर-जोर से धक्के मरने लगा जैसे ही मैं धक्का मरता था तो मैडम फिसल कर आगे चली जाती और उसके साथ मैं भी | हम दोनों ऐसे ही मजा करते-करते उसके पूरे आँगन में घूम गए | हम पानी और कीचड से पूरा भीग चुके थे | लेकिन हमें इसकी कोई परवाह नहीं थी | बस चिंता थी तो अपने मजे की | शायद मैडम इस मौके का इन्तजार काफी समय से कर रही थी जो उसे आज मिला है | 

मैंने भी अपनी तरफ से पूरा ज़ोर लगा दिया और मैडम को स्वर्ग का रास्ता दिखा दिया | कभी मैं मैडम के ऊपर कभी मैडम मेरे ऊपर, कभी दिवार के साथ खड़े होकर तो कभी मैडम को घोड़ी बना कर | मैडम को जितने भी आसान आते थे हमने वो सब किये | दुनिया को भूल कर हमने वो आनंद की प्राप्ति की जो शायद हमें दुबारा कभी न मिले | मैडम अपने चर्म-सुख पे थी और मैं भी, मेरी धक्के मारने की रफ़्तार तेज हो गयी और मैडम की आहें बढ़ने लगी | आह...आह.. राकेश और तेज राकेश, तुम मेरी ज़िंदगी में पहले क्यों नहीं आये राकेश... ? और तेज...और तेज, मुझे अपनी बना लो राकेश मैं सारी उम्र तुम्हारी सेवा करती रहूंगी, मुझे चोद दो आह, अम्म्म आआह्ह्ह्ह ज़ोर से और ज़ोर से फाड़ दो मेरी, आह्ह्ह्ह | 

अंत में मैडम को चर्म-सुख मिल गया और उनकी आहें काम हो गयी | लेकिन मैं अभी भी लगा पड़ा था, मैडम ने मुझे जोर से अपने सीने से लगा लिए और थोड़े टाइम बाद ही मेरा भी हो गया | अब हम दोनों चर्म सुख लेकर लेते हुए थे मैं मैडम के ऊपर वो मेरे नीचे | हम दोनों बिना बात किये आधे घंटे से जायदा ऐसे ही लेते हुए थे | उसके बाद हम उठे, उसने मुझे नहाने के लिए टॉवल दिया और नए कपडे भी | 

सुबह मैं अपने घर आ गया |