मेरी गर्ल फ्रेंड की सहेली मुझे भैया बोलती थी लेकिन बाद में पता चला की वो तो... 

    मेरा नाम जानू हैं (बदला हुआ नाम) मैं आपको अपने एक ऐसे किस्से के बारे मैं बताने जा रहा हूँ जिसे पढ़कर आप भी हैरान हो जाएंगे, और सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि ऐसा भी हो सकता है क्या ? अपने कॉलेज के दिनों जब मैं नया-नया कॉलेज पड़ने के लिए गया तो और भी बहुत सारे लड़के और लड़कियां भी नए दाखिल हुए थे | आपको भी पता है जब कोई लड़का या लड़की जवानी में कदम रखते हैं और किसी कॉलेज में दाखिला लेते हैं तो सबसे पहले वो यह देखते हैं के मेरी सेटिंग किस्से होगी ? लड़का अपने लिए लड़की ढूंढ़ता है और लड़की अपने लिए लड़का | मैं भी अपनी सेटिंग करने में ही लगा था,  लड़कियों का एक झुंड था, जिसमें  4-5 लड़कियां थी और वो एक साथ ही रहती थी | मुझे उस झुंड में से एक लड़की बहुत ही क्यूट लगी और वो अच्छी भी थी | मैंने उसे पटाने का फैसला कर लिया | मैं हर रोज़ कोई न कोई तरकीब निकालता ताकि उसे पटा सकूँ | एक दिन मेरी तरकीब काम कर गयी और वो मुझसे इम्प्रेस भी हो गयी | 

    अब मैंने देर न लगाते हुए अपने प्यार का इज़हार कर दिया और मेरी अच्छी किस्मत उसने मेरा प्रोपोज़ल एक्सेप्ट भी कर लिया | हमारी सेटिंग होते ही उसके साथ की लड़कियों में से एक लड़की मुझे भैया बुलाने लगी और बाकी बोलने लगी की हम तो आपको जीजू कहेंगी | मैंने कहा मुझे कोई दिक्कत नहीं है आप जो चाहो मुझे कह सकती हो | 

    वैसे तो सभी लड़कियां सूंदर थी अच्छी थी, हॉट थी, सब मस्त थी लेकिन आप कभी भी अपनी सेटिंग की सहेलियों के  साथ सेटिंग करने की मत सोचना आपको भारी पड़ सकता है | मैंने सबको अपना अच्छा फ्रेंड मान लिया | और सो मुझे भैया बोलती थी उसे अपनी बहन मान लिया | और हम पढ़ाई करने लगे रोज़ कॉलेज आते क्लास अटेंड करते, कैंटीन में जाते बातें करते और खाते-पीते | ऐसे ही हमारी ज़िंदगी गुजरने लगी | जो मुझे अपना जीजा मानती थी वो थी तो बहुत मज़ाकिया लेकिन अच्छी लड़कियां थी लेकिन जो मुझे अपना भैया मानती थी यह किस्सा उसी के ऊपर है | 


वो दिखने में बहुत ही भोली थी | हर समय क्यूट सी स्माइल देकर मुझे भैया-भैया करते रहती थी | 

    अब मेरी जान की सहेलियां थी इसीलिए मैं उनकी बात भी मान लेता था | सबके पास मेरा मोबाइल नंबर था, और सबका मेरे पास | ऐसे में हम कभी-कभी पढ़ाई के बारें में भी फ़ोन पे डिस्कस कर लेते थे | जो मेरी बहन बनी थी उसका नाम वसुंद्रा (बदला हुआ नाम) था | वो हर समय मुझे भैया-भैया करती रहती थी | मुझे अच्छा भी लगता था कि चलो एक लड़की तो ऐसी मिली जो मुझे सच में भैया मानती है | मैं अगर कोई बात कह देता था तो वह मानती भी थी | हम दोनों कई वार व्हाट्स एप्प पर भी बातें करते रहते थे | अगर उसे कोई प्रॉब्लम होती तो वह मुझे ही बताती थी और मैं उसे जो भी सलाह देता वो मान लेती थी | 

    एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ पार्टी करके घर को जा रहा था, मैंने शाराब भी काफी पी रखी थी | मेरे पास वरना कार है तो मैं अपनी कार से घर जा रहा था, रात के करीब 11 वजे हुए थे | मैं अपने घर से थोड़ी ही दूर था कि मुझे वसुंद्रा का फ़ोन आने लगा, मैंने जब देखा तो सोचने लगा की इतनी रात को इसने क्यों फ़ोन किया ? जैसे के मैंने आपको बताया की मैं उसे बहन मानता था और वो मुझे भैया तो मैंने उसका काल अटेंड किया कि पता नहीं क्या बात होगी | जैसे ही मैंने उसका कॉल अटेंड किया तो जो बात-चीत हुयी वो आप नीचे पड़ सकते हैं -


जानू- हेलो

सुंदरा- हेलो, भैया (रोते हुए) आप कहाँ हो ? 

जानू- मैं तो अपने घर जा रहा हूँ, तुम रो क्यों रही हो क्या बात हो गयी ? 

सुंदरा- भैया मुझे आपसे एक बात करनी थी | 

जानू- है तो बोलो मैं सुन रहा हूँ, क्या बात है ?

सुंदरा- फ़ोन पे नहीं, आप मेरे घर आ जाओ

जानू- अरे, सुंदरा रात के 11 वाज चुके हैं, बहुत रात हो चुकी है, अभी मैं तुम्हारे घर आऊंगा अच्छा नहीं लगेगा | तुम्हारे घर वाले क्या सोचेंगे ?

सुंदरा- कोई कुछ नहीं सोचेगा भैया, घर पे कोई नहीं है | मैं अकेली हूँ, और मुझे डर भी लग रहा है और मैंने आपसे बहुत जरूरी बात भी करनी है | 

जानू- सुंदरा, तुम घबराओ मत अगर चाहो तो मेरे साथ फ़ोन पे ही सारी रात बात करती रहो, इस टाइम घर आना अच्छा नहीं रहेगा | 

सुंदरा- नहीं, आप अभी मेरे घर आओ, नहीं तो मैं कुछ खा लूंगी, मैं बहुत दुखी हूँ | 


    जब उसने ऐसा कहा तो मुझे लगा कि अब तो उसके घर जाना ही चाइये, पता नहीं वो क्या कर ले | मुझे उम्मीद थी कि उसका किसी लड़के से कोई चक्कर चल रहा था , मैंने सोचा कि उस लड़के ने धोखा दे दिया होगा इसीलिए शायद वो दुखी है | मैंने गाडी उसके घर की तरफ मोड़ ली | और उसके घर पहुँच गया | 

    घर पहुँचते ही, उसने मुझे कस कर अपने सीने से लगा लिया और रोने लगी | मैंने कहा, "हुआ क्या यह तो बताओ" उसने अपने आंसू पोंछे और मुझे अंदर ले गयी | हम उसके बैडरूम में थे | उसे भी पता चल चूका था कि मैंने शराब पी रखी है | मैं बेड पर बैठ गया | और उसकी तरफ देखने लगा कि वो मुझे बात बताएगी कि आखिर वो रो क्यों रही थी | 

    लेकिन यह क्या, उसने अपनी नाईटी उतार के फ़ेंक दी और बिलकुल नंगी हो गयी | उसने नीचे कुछ नहीं पहना था | उसे बिलकुल नंगा देखकर मैं बेड पे खड़ा हो गया और उसके ऊपर चिल्लाने लगा, "सुंदरा से तुम ने क्या किया, तुम मुझे अपना भैया मानती हो, और तुम मेरे सामने अपने कपडे उतार कर नंगी खड़ी हो गयी, तुम शर्म नहीं आयी" | मुझे चिललाता देखकर उसने कुछ नहीं किया वो सिर्फ हल्का सा मुस्करायी और मेरी तरफ बढ़ने लगी, मेरे पास आकर उसने मेरी आँखों में आँखे डाल ली और बोली, "इसमें शर्म की क्या बात है भैया, क्या आप ने पहले कभी किसी लड़की को ऐसे नहीं देखा ? 

देखा है लेकिन उनकी बात अलग है तुम मुझे अपना भैया मानती हो" 

    अरे छोड़ो न, भैया तो मैं आपको इसीलिए बोलती हूँ ताकि कोई हम पर शक न करे, आपको पता है न की लोग तो हर समय लड़कियों पर ही नज़रें गड़ा कर रखते हैं कि कौन किसके साथ क्या बात कर रही है और किधर जा रही है | असल में तो मैं आपकी शुरू से ही दीवानी हूँ, जब से मैंने आपको देखा है मैं तो तब से ही आप के साथ सोना चाहती थी | लेकिन आप ने मुझे पसंद करने की वजाये मेरी फ्रेंड को पसंद कर लिया, तो मेरे पास आपको भैया बोलने के सिवा और कोई चारा नहीं था | 

    मेरा गुस्सा अब थोड़ा कम हो गया था, "अरे तो भैया न बनाती जैसे दूसरों ने मुझे जीजा बनाया है, तुम भी जीजा बोल लेती" | वो फिर मुस्करायी और बोली, "अरे मेरे प्यारे भैया अगर मैं आपको जीजा बोलती तो क्या मेरी फ्रेंड मुझे आपकी गाडी में कहीं जाने देती ? क्या हम दोनों कभी फ़ोन पे घंटों बातें कर पाते | मेरी फ्रेंड आप पर शक करने लग जाती | इसीलिए मैंने आपको भैया बना लिया, क्यों के भैया और बहन के ऊपर कोई शक नहीं करता | " 

    ओह्ह माय गॉड ! उसका आज यह रूप देखकर मैं तो दंग ही रह गया था | पता नहीं वो क्या-क्या बोले जा रही थी, ऐसे-ऐसे लॉजिक दिए जा रही थी की मेरा दिमाग की काम करना बंद कर दिया | मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था तो मैंने उसने बड़े ही पयार से पुछा, "तो अब तुम क्या चाहती हो ? उसने पूरी कशिश से कहा, "अपने कपडे उतारो और मेरी आग बुझा दो | मैं इस बात पे हैरान था की वो हर एक बात बिना रुके और झिझके बोल रही थी | मैं सोच रहा था कि यह कैसी लड़की है ? इतने में ही उसने मेरे औज़ार को पकड़ लिया और मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दिया | आह, मेरी शराब का नशा दुगना हो गया था | अब मुझे भी इस बात की कोई चिंता नहीं थी की वो बहन है या क्या | अब तो मुझे भी काम चढ़ चूका था, मैंने उसको गर्दन से पकड़ा और उसे पूरे ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा | चूमते-चूमते ही मैंने अपने भी सारे कपड़े उतार कर फ़ेंक दिए | और हम दोनों बेड पर लेट गए मैं उसके ऊपर था और वो मेरे नीचे | हम दोनों एक दुसरे को चूमते ही जा रहे थे | उसकी आँखों में एक अजीब जा सकून दिखाई दे रहा था | जैसे मानो वो सदियों से इस पल का इन्तजार कर रही हो | इसीलिए मैंने भी सोचा कि जब यही मुझे अपना भैया सिर्फ दिखाबे के लिए मानती है तो मुझे क्या, लड़की खुद कपडे उतार कर चुदने के लिए तयार है और तुम क्या चाहिए ?


    मैं सब कुछ भूल कर बस मजे करने लगे, उसे चूमता ही गया, चूम-चूम कर उसके होंठ बिना लिप्सिक के लाल हो गए | मेरी आँखों में तो पहले ही नशा था अब वो भी नशे से पूरी भरी हुयी लग रही थी | उसके बाद मैं थोड़ा नीचे आ गया और उसकी छाती के बड़े-बड़े और गोरे-गोरे गुबारों को चूसने लगा | गुबारों की चोंचियाँ काली-काली और पूरी मस्त थी | चूसने में इतना मजा आ रहा था कि आज तक पहले कभी न आया हो | सुंदरा पूरे बेड पे ऐसे मचल रही थी जैसे कोई सांप हो | उसे पूरा मज़ा आ रहा था | और मेरी तो लॉटरी लग गयी थी | 

    मेरे बिना कुछ किया ही मुझे एक लड़की खुद-ब-खुद मिल गयी थी | जिसे सिर्फ और सिर्फ मेरा गर्म-गर्म औज़ार चाहिए था | वो बस औज़ार की भूखी थी | गुबारों के अंदर हवा भरने के बाद मैं और नीचे आया और उसकी टांगों के बीच राखी मिठाई को चाटने लगा | वाह, कितनी स्वादिस्ट मिठाई है | मैं पागल होकर पता नहीं कितना टाइम मिठाई ही खाता रहा | और वो ऐसे ही लेती मचलती रही और आहें भरती रही | 

    आहों के साथ उसके मुँह से एक बात और भी निकल रही थी जो मुझे सुनाई तो दे रही रही लेकिन मैंने उसके ऊपर धयान नहीं दिया | जब भी मैं अपनी ज़ुबान लम्बी करके मिठाई पर मारता तो उसके मुँह से बस एक बात ही निकलती, "आह, भैया बहुत मजा आ रहा है, अपनी बहन को ऐसे ही पयार करते रहो, आह भैया | मैंने इस बात पर धयान न देते हुए अपना काम चालु रखा | 

    फिर उसने मुझे खुद रोक दिया और पकड़ कर मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरा औज़ार पकड़ कर एकदम से अपने मुँह में लेके गलप-गलप करने लगी | वो इतने अच्छे से औज़ार को चूस रही थी जैसे कहीं फौरन कंट्री से कोई ट्रेनिंग लेके आयी हो | बड़े ही ध्यान और आराम से, ऐसे लग रहा था की औज़ार मुँह में नहीं उसकी मिठाई में रखा हुआ है | मैं मन ही मन सोच रहा था की साला मैंने तो कभी अपनी गर्ल फ्रेंड के बिना किसी और की तरफ आँख उठा कर भी नहीं देखा | लेकिन लड़कियां अपने मन में कितना कुछ दबा के रखती हैं | मुझे भैया बनाकर मुझसे चुदने को यह कब से बेकरार थी और मैंने यह सोचा भी नहीं था | 

    मेरे सोचते-सोचते ही वो उठी और मेरी तरफ मुँह करके मेरे औज़ार के ऊपर खड़ी हो गयी अपनी टाँगे खोल कर | मैं उसकी तरफ देख रहा था और वो मेरी तरफ | फिर उसने मुझसे पुछा, "क्यों भैया असली मज़ा शुरू किया जाए ? क्या आप अपनी बहन की आग देखना चाहोगे ? लेकिन थोड़ा संभल कर कहीं आप को इस मिठाई की लत न लग जाए | " मैंने भी कह दिया, "अब तो चाहे लत ही लग जाए तुम बस मिठाई खिला ही दो | " मेरे इतना कहते ही वो झट से औज़ार के ऊपर बैठ गयी | और हम दोनों की एक-साथ आह निकल गयी | 

    मैं तो बस लेता हुआ था, सुंदरा ने अपना पूरा ज़ोर लगा दिया है | गप-गप चल रहा था | शराब के नशे में मिठाई खाने का और भी मजा आ रहा है | उसकी मिठाई छोटी थी लेकिन बहुत ही टेस्टी थी | वो ज़ोर-ज़ोर से ऐसे उछल रही थी जैसे मानो उसे यही एक काम आता हो | 

    पांच मिनट में ही हम दोनों झाग से भर चुके थे, अब गपा-गप अकेला नहीं हो रहा था, अब दिवाली के पटाखे भी चल रहे थे| वो भी पूरे ज़ोर से | जब वो थोड़ा थक गयी फिर मैं उठा और उसके बाद मैंने अपने निशाने लगाने शुरू कर दिए | कभी उसके ऊपर, कभी घोड़ी बनाकर | मुझे भी और कुछ नहीं दिख रहा था, बस मन में यही था की आज के बाद या तो यह किसी को भैया नहीं बोलेगी या फिर भैया बोलकर उसके साथ रंगरलियां मानाने के बारें में नहीं सोचेगी | मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी और लगभग 5 घंटो तक पटाखे चलते रहे | मेरा 3 वार मिस फायर भी हो गया था और उसका भी | लेकिन फिर भी हम लगे हुए थे | सुबह तक तो वो भी पूरी ढीली पड़ चुकी थी और मेरा भी जोश थोड़ा कम हो गया था | 

    फिर हम दोनों लेट गए और मैंने उससे पुछा के तुम्हारे घरवाले कभ आएंगे तो उसने बताये कि अभी दो दिन और नहीं आएंगे | तो मैंने औज़ार उसके अंदर डालकर उसके ऊपर ही लेट गया और मुझे इस ही नींद आ गयी और वो भी सो गयी | 


बाकी का अगले भाग में...